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insurance policy should not become a false dream of a better future know right investment tips here | बेहतर भविष्य का झूठा सपना न बन जाए Insurance पॉलिसी लेना, जानें सही निवेश का कारगर तरीका

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Insurance Policy- India TV Paisa
Photo:FILE Insurance Policy

Insurance Policy: इन्वेस्टमेंट क्या है? इसे ज्यादातर लोग नहीं समझते। शायद आप भी ठीक से नहीं समझते होंगे। अगर समझते हैं तो भाई मेरी गुस्ताखी माफ करें! आइए, अब मुद्दे पर आते हैं। जाने अंजाने में कई लोग आपके संपर्क में आए होंगे, जिन्होंने फलां-फलां पॉलिसी के बारे में बताकर आपके पैसे लगवा दिए होंगे। यानी ऐसे लोग अपना टारगेट पूरा करने के चक्कर में आपको कोई भी ऐसी पॉलिसी बेच देते हैं, जिससे आपको लॉन्ग टर्म में घाटा ही होता है। हमारे और आपके ईर्द-गिर्द ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को मिक्स कर आपको ऐसे बताएंगे कि आप उस स्कीम पर मोहित हो जाएं। और यहीं से आपको चूना लगाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मैं किसी खास कंपनी या बीमा कंपनी का नाम नहीं लूंगा। ये बीमा कंपनी देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी है। आप समझदार हैं, खुद ही समझ सकते हैं। आज मैं उसी कंपनी के मकड़जाल से आपको निकालने की कोशिश करूंगा।

डबल तड़के से बचें… इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट अलग-अलग रखें

सबसे पहले आपको ये जानना जरूरी है कि आखिर मैं ये बात क्यों कह रहा हूं। चलिए आपको एक उदाहरण से समझाता हूं। राम और श्याम ने अलग-अलग तरीके से इन्वेस्टमेंट की शुरुआत की। राम को दिल्ली में नई-नई नौकरी लगी। इस बात की खबर उसके बड़े भाई के दोस्त को भी हुई। जो एक बीमा कंपनी से जुड़े हुए थे। वो राम के पास पहुंच गए और अपना परम हितैशी बताते हुए राम को 2 लाख की एक बीमा पॉलिसी बेच दी। जिसका प्रीमियम करीब 12 हजार रुपये सालाना था। और तब से लेकर अबतक राम उस कंपनी में इन्वेस्ट कर रहा है। राम को बताया गया था कि 20 साल के बाद मैच्योरिटी पर करीब 5 लाख रुपये मिलेंगे। और ये भी बताया गया था कि बीच में कोई अनहोनी होने पर आपको 5 लाख रुपये मिल जाएंगे। राम खुश था कि पॉलिसी के शुरू हो जाने से उसका पूरी तरह रिस्क कवर हो गया है। लेकिन उसे उस वक्त ये बताया ही नहीं गया था कि महज 5 लाख का रिस्क कवर उसके और उसकी फैमिली के लिए कितना कम है। 

अगर बताया भी गया होता तो उसका प्रीमियम इतना अधिक होता कि राम उस वक्त पॉलिसी ले ही नहीं पाता, क्योंकि उसकी सैलरी उस वक्त कम थी। उसे तो ये बताया गया कि 20 साल के बाद आपको 5 लाख रुपये मिलेंगे। और अगर इस बीच आपको कुछ हो गया तो 5 लाख आपके घरवालों को मिल जाएंगे। यानी इन्वेस्टमेंट के साथ इंश्योरेंस का डबल तड़का लगाकर राम के सामने पेश किया गया। इसके अलावा भी आज के वक्त में उसने कई सारी पॉलिसी खरीद रखी है। जिससे आज की तारीख में पैसे निकालने पर उसे भारी भरकम का नुकसान होगा। क्योंकि जबतक पॉलिसी की मैच्युरिटी नहीं हो जाती है, बोनस का एक भी पैसा राम को नहीं मिलेगा। यानी पूरे 20 साल तक राम को पॉलिसी में फंसे रहना होगा। 

दोनों के रिटर्न में जमीन आसमान का फर्क देखिए

तो वहीं दूसरी तरफ श्याम ने इन्श्योरेंस के लिए हेल्थ पॉलिसी और जीवन बीमा के लिए टर्म प्लान ले लिया था। चूंकि राम और श्याम दोनों ने 2008 में ये काम स्टार्ट किया था, श्याम की उम्र उस वक्त 24 साल थी। इसलिए टर्म प्लान का प्रीमियम भी काफी कम का पड़ा। उसने समझदारी दिखाते हुए 50 लाख का टर्म प्लान लिया जो उसके नहीं रहने पर उसकी फैमिली की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त रकम है। साथ ही उसने हेल्थ इन्श्योरेंस पॉलिसी ले ली। बस इन्हीं दो पॉलिसी को लेने के बाद उसने कोई दूसरा इन्श्योरेंस नहीं लिया। जो बिलकुल सही तरीका है। इसके साथ ही इन्वेस्टमेंट के लिए श्याम ने FD की जगह म्यूचुअल फंड को चुना। और हर महीने 4-4 हजार रुपये डालता गया। और सालाना म्यूचुअल फंड में 10% की बढ़ोतरी करता रहा। जिससे आज की तारीख में उसके पास करीब 33 लाख रुपये हो चुके हैं। यही है कंपाउंडिंग इफेक्ट। 

कंपाउंडिंग इफेक्ट का मजा देखिए

10 साल बाद श्याम को ये बात समझ में आई कि उसने कितनी बड़ी गलती की थी। जिसके बाद उसने अपनी गलती सुधारी और पिछले 5 साल से वो म्यूचुअल फंड में हर महीने 25 हजार रुपये की भारी भरकम रकम इन्वेस्ट कर रहा है, जिसके बाद उसके अकाउंट में आज की तारीख में महज 20 लाख रुपये ही होंगे। दोनों ने करीब 15 लाख रुपये इन्वेस्ट किए। फर्क सिर्फ इतना रहा कि राम ने इन्वेस्टमेंट श्याम से 10 साल पहले शुरू किया था। बिना अपने ऊपर ज्यादा बर्डन लिए । राम और श्याम दोनों ने करीब 15-15 लाख रुपये ही लगाए लेकिन रिटर्न में 13 लाख का फर्क आ गया। अगर इसी तरह इन्वेस्टमेंट को दोनों ने 5 साल के लिए और जारी रखा तो राम के पास करीब 75 लाख रुपये होंगे, जबकि उसका कुल इन्वेस्टमेंट करीब 28 लाख होगा। और श्याम 30 लाख लगाकर भी महज 58 लाख रुपये ही पाएगा। यानी फर्क इस बात से नहीं पड़ता कि आपने कितना ज्यादा पैसा लगाया है फर्क इस बात से पड़ता है कि आपने कब पैसा लगाया है। जितनी जल्दी शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग इफेक्ट उतना ही शानदार तरीक से काम करेगा। ये सारा कैल्कुलेशन आप भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं। गूगल में जाकर SIP Calculator टाइप करके आप इसे देख सकते हैं। म्यूचुअल या इंडेक्स फंड्स में सालाना 12% का ग्रोथ नॉर्मल है। जो FD के रेट से काफी अच्छा माना जाता है। इस तरह आप ऊपर दिए गए उदाहरण से समझ ही गए होंगे कि बीमा कंपनी से कौन से पॉलिसी आपको लेनी है, और कौन सी नहीं। बहुत लोगों का दिमाग श्याम की तरह काफी देर से खुलता है, जिससे वो काफी अधिक पैसे गंवा देते हैं। या यूं कहें आपके पैसे से बीमा कंपनियां मुनाफा कमाती हैं और आपको बेहद कम रिटर्न मिलता है। 

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